मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए CSC संचालकों को मिलेगी ट्रेनिंग, फार्म-6 की डुप्लीकेट एंट्री रोकने की तैयारी
अन्य खबरे Nov 05, 2026 at 07:30 PM , 20**फार्म-6 भरते समय अपना वास्तविक मोबाइल नंबर और पूरा पता देना जरूरी, सही पिन कोड से घर पहुंचेगा वोटर आईडी कार्ड**
**लखनऊ, 5 नवंबर।** उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले नागरिकों को अब दोहरी प्रविष्टियों (Multiple Entries) की समस्या से बचाने के लिए विशेष पहल की जा रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि जन सुविधा केंद्रों (CSC) के संचालकों को फार्म-6 भरने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि संज्ञान में आया है कि कई बार आवेदकों को फार्म-6 जमा करने के बाद मोबाइल पर रेफरेंस नंबर का मैसेज नहीं मिलता। इसके चलते वे दोबारा आवेदन कर देते हैं, जिससे मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की एक से अधिक प्रविष्टियां होने की समस्या पैदा होती है।
**ई-साइन के बाद ही जनरेट होता है रेफरेंस नंबर**
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 का अंतिम सबमिशन ई-साइन के बाद ही होता है। आवेदक द्वारा आधार नंबर देने पर आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त होता है। ओटीपी दर्ज करने के बाद ई-साइन की प्रक्रिया पूरी होती है और आवेदन का रेफरेंस नंबर जनरेट होता है।
फार्म सफलतापूर्वक जमा होने पर स्क्रीन पर आवेदन प्राप्त होने का संदेश भी प्रदर्शित होता है। इसलिए मोबाइल पर मैसेज नहीं आने की स्थिति में दोबारा फार्म भरने के बजाय स्क्रीन पर प्रदर्शित रेफरेंस नंबर को नोट कर लेना चाहिए।
**CSC संचालक अपना मोबाइल नंबर न करें दर्ज**
नवदीप रिणवा ने कहा कि फार्म-6 में आवेदक अथवा उसके संबंधी का मोबाइल नंबर दर्ज किया जा सकता है। हालांकि, जन सुविधा केंद्र के माध्यम से आवेदन करते समय संचालक को आवेदक का वास्तविक और सक्रिय मोबाइल नंबर ही दर्ज करना होगा।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि CSC संचालक आवेदक के स्थान पर अपना मोबाइल नंबर अथवा कोई काल्पनिक या गलत नंबर दर्ज न करें। फार्म में दर्ज मोबाइल नंबर पर ही आवेदन जमा होने की सूचना और रेफरेंस नंबर भेजा जाता है। इसी नंबर के माध्यम से भविष्य में आवेदन की स्थिति भी ट्रैक की जा सकती है।
**मोबाइल पर मैसेज नहीं आए तो दोबारा आवेदन न करें**
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कभी-कभी नेटवर्क संबंधी समस्या के कारण मोबाइल पर रेफरेंस नंबर का संदेश नहीं पहुंच पाता है। ऐसी स्थिति में ई-साइन के बाद स्क्रीन पर प्रदर्शित रेफरेंस नंबर का स्क्रीनशॉट लेकर आवेदक को उपलब्ध कराया जाए अथवा नंबर लिखकर उसे साझा किया जाए। इससे एक ही व्यक्ति के नाम से बार-बार आवेदन किए जाने की समस्या रोकी जा सकेगी।
**सही पता और पिन कोड देना भी जरूरी**
उन्होंने बताया कि मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) डाक विभाग के माध्यम से स्पीड पोस्ट से भेजा जाता है। यदि आवेदन में आवासीय पता अधूरा या पिन कोड गलत दर्ज किया गया है तो डाक विभाग द्वारा कार्ड वापस किया जा सकता है। इसलिए फार्म-6 भरते समय मकान नंबर, मोहल्ला, गांव, पोस्ट ऑफिस और सही पिन कोड सहित पूरा पता दर्ज करना आवश्यक है।
**एक मोबाइल नंबर से मिलेंगी कई सुविधाएं**
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार फार्म-6 में वास्तविक और सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज करने के कई फायदे हैं।
- आवेदन जमा होने की पुष्टि रेफरेंस नंबर के साथ मोबाइल पर मिलेगी।
- रेफरेंस नंबर के माध्यम से आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सकेगी।
- पता, फोटो, आयु प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेजों में कमी होने पर सूचना मिल सकेगी।
- मतदाता अपना ई-ईपीआईसी (e-EPIC) डाउनलोड कर सकेंगे।
- मतदाता सूची में अपना नाम, विधानसभा क्षेत्र, मतदेय स्थल और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इसके लिए नागरिक निर्वाचन आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in अथवा ECINET मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं।
**जिला निर्वाचन अधिकारियों को विशेष निगरानी के निर्देश**
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और बूथ लेवल अधिकारी भी फार्म-6 की दोहरी प्रविष्टियों को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतें।
इसके साथ ही जन सुविधा केंद्र संचालकों और आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया और प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कराने को कहा गया है।






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