आयुर्वेद भारत की प्राचीन विरासत ही नहीं, स्वस्थ भविष्य की मजबूत आधारशिला भी : श्री केशव प्रसाद मौर्य
जनपत की खबर Sep 23, 2026 at 09:39 PM , 27आयुर्वेद, योग एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक अनुसंधान और नवाचार से जोड़कर वैश्विक स्तर पर बढ़ाया जाए
आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को आधुनिक अनुसंधान, शिक्षा एवं नवाचार से जोड़कर वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास जारी
स्वस्थ भारत और स्वस्थ उत्तर प्रदेश के निर्माण में आयुर्वेद, योग एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की महत्वपूर्ण भूमिका
: श्री केशव प्रसाद मौर्य
लखनऊ: 23 सितम्बर, 2026
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा और आयुर्वेद का महत्व आज निरंतर बढ़ रहा है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में भारत की समृद्ध आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान मिल रही है। आयुर्वेद को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ते हुए अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ भारत और स्वस्थ उत्तर प्रदेश के निर्माण में आयुर्वेद, योग, होम्योपैथी, यूनानी सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को मर्करी हॉल, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी को आयुर्वेद दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
श्री मौर्य ने कहा कि गांवों में एक प्रचलित कहावत है—“पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया।” स्वस्थ शरीर ही जीवन की वास्तविक समृद्धि का आधार है। आयुर्वेद और योग स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने तथा निरोगी जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास निरंतर बढ़ रहा है और इस विश्वास को और मजबूत करने के लिए अनुसंधान तथा प्रमाणिकता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वे एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के विरोधी नहीं हैं। प्रत्येक चिकित्सा पद्धति की अपनी उपयोगिता है। आवश्यकता इस बात की है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय एवं ज्ञान का आदान-प्रदान हो, ताकि प्रत्येक पद्धति की उपयोगी जानकारी व्यापक रूप से उपलब्ध हो और मरीजों को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में “एक जनपद-एक मेडिकल कॉलेज” की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी प्रकार प्रत्येक जनपद में आयुर्वेद शिक्षा एवं चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में आयुर्वेद के क्षेत्र में उच्च स्तरीय संस्थानों का विकास हो रहा है और इससे भारतीय चिकित्सा पद्धति में लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।
श्री मौर्य ने कार्यक्रम में उपस्थित पद्मश्री प्रोफेसर मनोरंजन साहू, पद्मश्री प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह तथा पद्मश्री प्रोफेसर के.के. ठकराल का अभिनंदन करते हुए कहा कि एक ही मंच पर तीन पद्मश्री विभूतियों की उपस्थिति गौरव की बात है। उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा हजारों वर्षों से भारत की जीवन पद्धति का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया योग को स्वीकार कर रही है और 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाना भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान परंपरा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लाभ पूरी दुनिया को मिलना चाहिए।
श्री मौर्य ने कहा कि भारत में परंपरागत रूप से उपलब्ध मोटे अनाज एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का महत्व आज पूरी दुनिया समझ रही है। जिसे कभी सामान्य भोजन माना जाता था, वही आज “श्री अन्न” और मिलेट्स के रूप में स्वास्थ्यवर्धक आहार के तौर पर वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए हमारी पारंपरिक जीवनशैली, खान-पान और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी ज्ञान परंपरा को समझना और अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने आयुर्वेद के विद्यार्थियों एवं भावी चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे आत्मविश्वास के साथ अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण के साथ स्वस्थ भारत और स्वस्थ उत्तर प्रदेश का संकल्प भी पूरा करना है। इस दिशा में आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े विद्यार्थियों, चिकित्सकों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” की भावना पर आधारित है। हमारी चिकित्सा परंपरा का उद्देश्य केवल भारत के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी आबादी को भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के ज्ञान और अनुभव से लाभान्वित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के साथ जोड़कर आगे बढ़ रहा है। आयुर्वेद के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों से अपील की कि वे अपने अनुसंधान के स्तर को निरंतर ऊंचा उठाएं और आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रमाणिक एवं प्रभावी बनाने में योगदान दें।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि स्वस्थ भविष्य की महत्वपूर्ण आधारशिला है। भारत की इस गौरवशाली चिकित्सा परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और आधुनिक संदर्भों में विकसित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री व राज्यमंत्री आयुष ने कार्यक्रम में पदम श्री से सम्मानित विभूतियों का
सम्मान,अंग वस्त्र,स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र
भेंटकर सम्मानित किया,इसके साथ ही योग कार्यक्रम,प्रतियोगिता जनपद एवं चिकित्सकों का सम्मान पुरस्कार एवं आयुष प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किये गये। इस अवसर पर श्री मौर्य ने आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन पोर्टल का शुभारंभ किया ।
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर मिश्र "दयालु" ने इस अवसर पर कहा कि आयुर्वेद दिवस के अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि स्वस्थ जीवनशैली का संदेश प्रत्येक परिवार तक पहुँचाएंगे, बच्चों एवं युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाएंगे तथा सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में अपना योगदान देंगे।
कहा कि आयुर्वेद दिवस की इस वर्ष की थीम 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' हमें इस बात पर विचार करने का अवसर प्रदान करती है कि किस प्रकार हम अपनी प्राचीन चिकित्सा परंपराओं, आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नवीनतम स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के समन्वय से जनसामान्य को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करा सकते हैं। आज चिकित्सा विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति की है। चिकित्सालयों की संख्या बढ़ रही है, आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हो रहे हैं तथा स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है।
प्रमुख सचिव, आयुष श्री रंजन कुमार ने कहा कि
आज आयुर्वेद दिवस के अवसर पर हम केवल एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति का उत्सव नहीं मना रहे हैं, बल्कि ऐसी समग्र स्वास्थ्य-पद्धति (Holistic health science) का सम्मान कर रहे हैं, जो शरीर और मन के साथ-साथ हमारी जीवनशैली एवं पर्यावरण को भी स्वास्थ्य का आधार मानती है। उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा विस्तार के बारे में सरकार द्वारा किये जा रहे अभिनव प्रयासों व अन्य क्रियाकलापों के बारे में प्रकाश डाला ।
इस अवसर पर राज्य मंत्री, आयुष श्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, प्रमुख सचिव आयुष श्री रंजन कुमार, महानिदेशक आयुष व निदेशक आयुष मिशन श्री गौरी शंकर प्रियदर्शी ,विशेष सचिव आयुष श्री मदन सिंह गर्ब्याल, आयुर्वेद निदेशक डा0 नारायण दास, होम्योपैथी निदेशक प्रमोद कुमार सिंह, यूनानी निदेशक प्रो0 जमाल अख्तर सहित एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ ,चिकित्सक, शिक्षक एवं आयुष छात्र-छात्राएं तथा अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारीगण मौजूद रहे।






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