जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों को नोटिस; CCTV और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के आदेश

जनपत की खबर , 143

आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई के निर्देश, मामले की स्वतंत्र जांच पर कोर्ट की टिप्पणी

नई दिल्ली। जंतर-मंतर और विभिन्न राज्यों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने हिंसा, पैलेट गन के कथित इस्तेमाल, छात्रों की भीड़ में आपराधिक तत्वों की मौजूदगी तथा पत्रकारों पर कथित हमलों सहित कई गंभीर मुद्दों पर विचार किया। 
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित राज्यों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन फुटेज, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट न हो। 
शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश में कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और जिन्हें हिरासत में लिया गया है, उन्हें रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसे प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कोई दंडात्मक या कठोर कार्रवाई न की जाए। 
सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाओं में लगाए गए आरोप स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता दर्शाते हैं। मामले की अगली सुनवाई में संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है। 

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