तीसरे चरण में 59 सीटों के लिये मतदान हो चुका

जनपत की खबर , 323

तीसरे चरण में 59 सीटों के लिये मतदान हो चुका हैं आकलन के अनुसार इस चरण में भाजपा गठबंधन एक बार फिर समाजवादी गठबंधन से बीस नजर आ रहा है सपा अपने गढ़ में ऐसा कोई चमत्‍कार करती नहीं दिख रही है, जो उसके लिये बहुत सकारात्‍मक पक्ष कहा जा सके इस इलाके को भले ही यादव बेल्‍ट कहा जाता हो, लेकिन इस इलाके में दूसरी कई जातियां भी प्रमुखता से हैं जो हार-जीत के समीकरण को प्रभावित करती हैं भाजपा पिछली बार तीसरे चरण की 59 सीटों में से 49 पर कब्‍जा जमाया था, सपा को 9 और कांग्रेस को एक सीट मिली थी. तीसरे चरण में कुल 28 सीटें ऐसी थी, जिस पर यादव वोट ठीक संख्‍या में है, लेकिन वह इनमें से 20 सीटों पर अकेले डिसाइडिंग फैक्‍टर नहीं है उसकी जीत तभी संभव है, जय अन्‍य जातियों का वोट उसमें जुड़े. इस बेल्‍ट में मुसलमान भी उतने डिसाइडिंग फैक्‍टर नहीं हैं, जितना दूसरे चरण में थे।

 अपने बेल्‍ट में भी सपा के धराशायी होने का मुख्‍य कारण यह है कि योगीराज में कानून व्‍यवस्‍था एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है अखिलेश तमाम प्रयास के बावजूद मतदाताओं को यह भरोसा दिलाने में असफल रहे हैं कि वह इस मोर्चे पर कुछ बेहतर करेंगे अखिलेश पुलिस को आधुनिक बनाने का श्रेय तो लेते हैं, लेकिन जमीन पर उनके कार्यकाल में बदहाल कानून व्‍यवस्‍था का भूत पीछा नहीं छोड़ रहा है मतदाता अखिलेश से नाराज नहीं है, लेकिन वह भरोसा नहीं कर पा रहा है सपा यादव और मुस्लिम के अलावा किसी अन्‍य जाति को अपने साथ जोड़ती नहीं दिख रही है कुछ सीटों पर दूसरी जातियों के उम्‍मीदवार उतारने से उन जातियों के छिटपुट वोट मिले हैं, लेकिन इन्‍हीं सीटों पर दूसरे दलों से उतरे मुस्लिम उम्‍मीदवारों ने उतना ही नुकसान भी पहुंचाया है।

भाजपा गठबंधन के साथ पॉजिटिव तथ्‍य यह है कि मोदी फैक्‍टर की वजह गैरयादव पिछड़ी जातियां एवं गैर जाटव दलित अब तक भाजपा से चिपका हुआ हैयोगीराज में बेहतर कानून-व्‍यवस्‍था की वजह से महिलाओं का बड़ा हिस्‍सा भाजपा की ओर हैं।

करहल में अखिलेश यादव तथा जसवंतनगर में शिवपाल सिंह यादव जीत जायेंगे, लेकिन अखिलेश का जीत मार्जिन कम रहने का अंदेशा है यह मुकाबला भी यादव-मुस्लिम बनाम अन्‍य नजर आ रहा है कम मतदान प्रतिशत बता रहा है कि वोटर सरकार बदलने के लिये नहीं निकल रहा है, बल्कि वह सरकार से कुछ नाराज जरूर है लेकिन बदलाव नहीं चाहता है, लिहाजा वह दूसरे को वोट देने की बजाय निष्क्रिय है वोटरों की इसी निष्क्रियता का थोड़ा फायदा सपा गठबंधन को मिलता दिख रहा है, क्‍योंकि सपा को यादव और मुस्लिम वोटर जमकर वोट कर रहा है सपा की कुछ सीटें बढ़ने का इसके अलावा दूसरा और कोई कारण नहीं है अनुमानत: 59 सीटों में भाजपा के पास 30 सीटें रह सकती हैं तथा सपा 24 सीटों पर जीत सकती है बसपा 4 सीटें और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है भाजपा तीन चरण के बाद 172 सीटों में 87  सीटों पर जीत हासिल करती नजर आ रही है, जबकि सपा और आरएलडी मिलकर 67 बसपा  14 एवं कांग्रेस 4सीटों पर जीत सकती है।

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