मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सेवा संकल्प अभियान के अन्तर्गत दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित किये

जनपत की खबर , 20

प्रधानमंत्री जी द्वारा ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग केवल 

शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में परिवर्तन का परिचायक: मुख्यमंत्री

 

दिव्यांगजनों को वितरित किए जा रहे उपकरण उनके सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास

 

किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि इस 

बात से होती कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अन्तिम पायदान 

पर बैठे व्यक्ति तक कितनी सहजता और मजबूती से पहुंच रहा

 

प्रदेश के पैरा खिलाड़ियों ने शारीरिक चुनौती के बावजूद अन्तरराष्ट्रीय 

स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया

 

दिव्यांगजन पेंशन में शीघ्र ही और वृद्धि की जाएगी

 

वर्ष 2026-27 के बजट में जनपद स्तर पर 

बचपन डे केयर सेण्टरों के विस्तार का प्राविधान 

 

उ0प्र0 देश का पहला राज्य, जहां दिव्यांगजन कल्याण से सम्बन्धित 02 विश्वविद्यालय

 

बच्चे में कॉक्लियर इम्प्लाण्ट का 06 लाख रु0 तक का खर्च सरकार वहन 

करती, स्पीच थेरेपी में परिवार को सहयोग प्रदान किया जाता

 

वर्ष 2026-27 में प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दिव्यांगजनों के लिए 

पर्याप्त संख्या में कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर लगाए जाएंगे

 

सभी कमिश्नरियों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र संचालित करने के निर्देश

लखनऊ: 30 सितम्बर, 2026

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग शुरू किया। यह केवल शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में परिवर्तन का परिचायक था। दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और सम्मान आवश्यक है। सरकार दिव्यांगजनों के साथ मजबूती से खड़ी है। उनके मार्ग की बाधाएं दूर करने और उन्हें सशक्त एवं स्वावलम्बी बनाने के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री जी आज गोरखपुर में प्रधानमंत्री जी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अन्तर्गत दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 509 दिव्यांगजन को विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरण वितरित किये गये। इनमें 127 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 ई-ट्राईसाइकिल, 70 ट्राईसाइकिल, 310 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 हियरिंग एड, 05 स्मार्टफोन, 01 ब्रेल गीता, 01 ब्रेल लिपि में रामचरितमानस, 10 कृत्रिम अंग एवं उपकरण से जुड़े अन्य उपकरण, 20 वयोश्री और 05 पाठ्य पुस्तकें शामिल हैं। कार्यक्रम दिव्यांगजन सशक्तिकरण पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी। 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पहले गुजरात और अब देश विकास की नई ऊँचाइयां प्राप्त कर रहा है। किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अन्तिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक कितनी सहजता और मजबूती से पहुंच रहा है। बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ अन्तिम पायदान तक पहुंचाना सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश शासन एवं हिन्दुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में दिव्यांगजनों को वितरित किए जा रहे उपकरण उनके सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचा है। व्यक्ति, जाति, मत, मजहब, क्षेत्र और भाषा किसी के लिए बाधक नहीं बने। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। जब सबका विकास होता है, तब सबका विश्वास भी सरकार में बढ़ता है। सभी के विकास के लिए हम सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करना चाहिए। आज इसी क्रम में दिव्यांगजनों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। 

भारतीय संस्कृति ने कभी किसी व्यक्ति को अधूरा नहीं माना। हमारे ऋषियों ने कहा है ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति, योजकस्तत्र दुर्लभः।’ अर्थात कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, उचित अवसर और उसकी प्रतिभा को पहचानने वाला योजक दुर्लभ होता है। प्रधानमंत्री जी जैसे योजक के नेतृत्व में प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकता है। गरीब को प्रधानमंत्री आवास, रसोई गैस कनेक्शन, शौचालय और पेंशन जैसी सुविधाएं मिली हैं। युवाओं के लिए सरकारी एवं निजी रोजगार के साथ स्टार्टअप, स्टैण्डअप, डिजिटल इण्डिया जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वावलम्बन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि परिवार और समाज का सहयोग मिले, तो शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा की राह में बाधक नहीं बन सकती। ऋषि अष्टावक्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजा जनक की सभा में उनके शरीर को देखकर विद्वानों के हंसने पर अष्टावक्र ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति का मूल्यांकन उसके ज्ञान और आत्मबोध से होना चाहिए, शरीर से नहीं। 

महाकवि सूरदास ने दृष्टिबाधित होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज संस्कृति को जिस सौन्दर्य के साथ अभिव्यक्त किया, वह उनकी अद्भुत प्रतिभा का प्रमाण है। रामायण धारावाहिक के संगीतकार रविन्द्र जैन भी दृष्टिबाधित थे, लेकिन उनकी प्रतिभा और संगीत ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई। इससे स्पष्ट है कि स्थूल चक्षुओं की सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन आत्मा, बुद्धि और विवेक की सीमाएं असीमित हैं। 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि टोक्यो पैरालम्पिक में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, मजबूत हौसलों से जीते जाते हैं। श्रीमती अरुणिमा सिन्हा ने अपना पैर खोने के बाद भी कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट की ऊंचाईयों को फतह किया था। श्रीमती दीपा मलिक, श्री देवेन्द्र झाझरिया, श्री मरियप्पन थंगावेलू, श्री सुमित अन्तिल, सुश्री अवनी लेखरा, सुश्री भावना पटेल और सुश्री मानसी जोशी जैसी पैरा खिलाड़ियों ने दुनिया में खेलों में प्रदेश का नाम रोशन किया है। 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के पैरा खिलाड़ियों में चेस खिलाड़ी श्री वैभव गौतम, हाई जम्पर श्री प्रवीण कुमार, सुश्री प्रीति पाल तथा प्रदेश सरकार में सचिव व बैडमिण्टन खिलाड़ी श्री सुहास एल0वाई0 सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी शारीरिक चुनौती के बावजूद अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इन खिलाड़ियों ने साबित किया है कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए। उचित साधन, प्रशिक्षण, परिवार एवं समाज का सहयोग और व्यवस्था द्वारा मार्ग की बाधाएं दूर होने पर प्रतिभा अपनी ऊंचाई तक पहुंच सकती है।

डबल इंजन की सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और स्वावलम्बन के लिए प्रतिबद्ध है। दिव्यांगजन पेंशन पहले 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये और फिर 1,000 रुपये की गई तथा इसमें शीघ्र ही और वृद्धि की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि घर से सड़क, सड़क से परिवहन, परिवहन से स्कूल, स्कूल से कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक दिव्यांगजनों के लिए प्रत्येक मार्ग सुगम हो।

दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए ब्रेल, ऑडियो सूचना, स्पर्श पथ, पीली स्पर्श पट्टी और सुगम डिजिटल सेवाएं, श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए साइन लैंग्वेज, कैप्शन और विजुअल अलर्ट तथा बौद्धिक अथवा अन्य सहायता की आवश्यकता वाले व्यक्तियों के लिए सरल भाषा, स्पष्ट संकेत और प्रशिक्षण सहायता की व्यवस्था पर सरकार कार्य कर रही है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। समय पर पहचान, स्क्रीनिंग, आवश्यकता के अनुसार थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता से बच्चे के लिए अवसरों का मार्ग जल्दी खोला जा सकता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में बचपन डे केयर सेण्टर की व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के बजट में 03 से 07 वर्ष तक के श्रवण बाधित, बौद्धिक दिव्यांग और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए जनपद स्तर पर ऐसे केन्द्रों के विस्तार का प्राविधान किया गया है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शिक्षा सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम है। केवल स्कूल में दाखिला पर्याप्त नहीं, बल्कि बच्चे का सीखना, आगे बढ़ना और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में विशेष विद्यालयों से उच्च शिक्षा के विशेष संस्थानों तक इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां दिव्यांगजन कल्याण से सम्बन्धित 02 विश्वविद्यालय हैं-लखनऊ का डॉ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय और चित्रकूट का जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय। दिव्यांगजनों को ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’, ‘पी0एम0 स्वनिधि योजना’, ‘एक जनपद-एक उत्पाद योजना’, ‘पी0एम0 विश्वकर्मा’, ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ और ‘प्रधानमंत्री स्टैण्डअप योजना’ से जोड़कर स्वावलम्बन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार सुरक्षा और स्वावलम्बन दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोरखपुर सहित प्रदेश में कॉक्लियर इम्प्लाण्ट जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। बच्चे में आवश्यकता की पहचान होने पर कॉक्लियर इम्प्लाण्ट का 06 लाख रुपये तक का खर्च सरकार वहन करती है तथा स्पीच थेरेपी में भी परिवार को सहयोग प्रदान किया जाता है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को डिजिटल कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।

वर्ष 2026-27 में प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दिव्यांगजनों के लिए पर्याप्त संख्या में कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर लगाए जाएंगे। दिव्यांजनों की पहचान की जाएगी तथा पात्रता के आधार पर पेंशन एवं शासन की अन्य सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा। 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोरखपुर में दिव्यांगजनों के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारम्भ किये गये हैं। यहां स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इण्टर कॉलेज, स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालिका इण्टर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, मनोविकास केन्द्र बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज, राजकीय स्किल डेवलपमेन्ट सेण्टर, मानसिक मन्दित आश्रय गृह-सह-प्रशिक्षण केन्द्र बालक एवं बालिका, उच्च शिक्षा में अध्ययनरत दृष्टिबाधित छात्रों एवं छात्राओं के लिए छात्रावास तथा बचपन डे केयर सेण्टर संचालित हैं। प्रदेश की सभी 18 कमिश्नरियों में डी0डी0आर0सी0 (जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र) संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में भी यह केन्द्र सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के परिसर में प्रारम्भ हो चुका है।

पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नरेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में दिव्यांगजनो का निरन्तर सशक्तिकरण किया जा रहा है। विगत साढ़े नौ वर्षों में दिव्यांग जनों के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। 

इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य मंत्री श्री संजय निषाद, विधान परिषद सदस्य डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह, डॉ0 महेन्द्र सिंह, विधायक श्री फतेह बहादुर सिंह, श्री विपिन सिंह, श्री महेन्द्र पाल सिंह, श्री श्रीराम चौहान, श्री प्रदीप शुक्ला, श्री राजेश त्रिपाठी, श्री विमलेश पासवान एवं श्री श्रवण कुमार निषाद, गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती साधना सिंह, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती चारू चौधरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 

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