*वर्ष 2047 की विकास परिकल्पना के अनुरूप प्रदेश में अवसंरचना विकास को देनी होगी गति* *एस.पी.गोयल,* *मुख्य सचिव*
जनपत की खबर Sep 29, 2026 at 01:55 PM , 18*मुख्य सचिव ने ‘Accelerating Linear Infrastructure Projects: Good Practices and New Ideas’ विषयक एक दिवसीय स्टेट लेवल वर्कशॉप का किया शुभारंभ*
*ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य के लिए विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी नेटवर्क का विस्तार आवश्यक*
*बेहतर तैयारी, समयबद्ध समन्वय और सक्रिय बाधा समाधान से तेज होगा प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास*
*दिनांकः 29 सितम्बर, 2026*
*लखनऊः* मुख्य सचिव श्री एस.पी. गोयल ने अहिमामऊ स्थित राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रूपाम) में ‘Accelerating Linear Infrastructure Projects: Good Practices and New Ideas’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय स्टेट लेवल वर्कशॉप का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान के लिए प्रभावी एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली विकसित करना तथा वर्ष 2047 की विकास परिकल्पना के अनुरूप प्रदेश में अवसंरचना विकास को गति देना है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी नेटवर्क का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब, एयरपोर्ट तथा शहरी अवसंरचना प्रदेश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय से पूरा करने के लिए निर्माण शुरू होने से पहले भूमि की उपलब्धता, डिजाइन, यूटिलिटी शिफ्टिंग तथा आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना नेतृत्व का फोकस केवल परियोजना की कुल भौतिक प्रगति अथवा पूर्णता प्रतिशत पर नहीं होना चाहिए, बल्कि बाधाओं की पहचान और उनके समयबद्ध समाधान पर होना चाहिए, जो निर्माण कार्य की गति को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने बड़े कॉरिडोर एवं परियोजनाओं को व्यवस्थित और प्रबंधनीय निर्माण खंडों में विभाजित करने पर जोर दिया, ताकि प्रत्येक स्तर पर प्रगति की प्रभावी निगरानी की जा सके।
उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की मॉनिटरिंग केवल समग्र स्तर पर न होकर निर्माण गतिविधियों के स्तर तक की जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि परियोजना के किस स्थान पर कार्य किस स्थिति में है तथा कहां भूमि, यूटिलिटी, पुल, कल्वर्ट, अतिक्रमण अथवा पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसी बाधाएं मौजूद हैं। ऐसी व्यवस्था से परियोजना प्रबंधकों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को किसी भी स्थान की स्थिति का तत्काल आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया।
उन्होंने भूमि अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग तथा ट्री कटिंग से जुड़े कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि संबंधित विभाग नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें और लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित करते हुए यूटिलिटी शिफ्टिंग एवं वृक्ष कटान से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि निर्माण कार्य में अनावश्यक विलंब न हो।
मुख्य सचिव ने कहा कि लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, रेलवे, विद्युत विभाग, जल निगम, दूरसंचार, राजस्व, वन, पुलिस तथा शहरी स्थानीय निकायों सहित अनेक एजेंसियां शामिल होती हैं। विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय के अभाव में परियोजनाओं में देरी की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके समाधान के लिए एक प्रभावी इंटरफेस मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें प्रत्येक समस्या के लिए संबंधित एजेंसी, उत्तरदायी अधिकारी, स्थान, निर्धारित समयसीमा तथा वर्तमान स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज हो।
उन्होंने कहा कि लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निर्माण मोर्चे की तैयारी, विभागीय समन्वय एवं स्वीकृतियां, हितधारक एवं इंटरफेस प्रबंधन तथा तकनीक एवं पारदर्शिता को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही जोखिम प्रबंधन, गुणवत्ता, सुरक्षा तथा अनुबंध प्रबंधन को सहायक स्तंभ के रूप में सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे, हाईवे और रेलवे नेटवर्क औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, शहरीकरण और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की आधारशिला बन रहे हैं। प्रदेश का उद्देश्य केवल अधिक किलोमीटर सड़क अथवा रेल नेटवर्क तैयार करना नहीं, बल्कि औद्योगिक क्लस्टरों, शहरों, बाजारों, लॉजिस्टिक्स हब, बंदरगाहों, एयरपोर्ट तथा रेलवे नेटवर्क के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित करना होना चाहिए। इससे आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास के लिए भी बेहतर आधार तैयार होगा।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों का आह्वान किया कि तेज योजना, बेहतर पूर्व-तैयारी, समयबद्ध समन्वय तथा बाधाओं के सक्रिय समाधान के माध्यम से गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति दी जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी को कम करने के लिए समस्याओं के उत्पन्न होने की प्रतीक्षा करने के बजाय संभावित बाधाओं की पहले से पहचान कर उनके समाधान की तैयारी की जानी चाहिए।
मुख्य सचिव ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला के माध्यम से उद्योग जगत एवं विभिन्न संस्थाओं की बेहतर कार्यप्रणालियों, अनुभवों और नए विचारों का आदान-प्रदान होगा। इससे उत्तर प्रदेश में अधिक दक्ष, तकनीक-आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास व्यवस्था स्थापित करने में सहायता मिलेगी तथा प्रदेश की दीर्घकालिक विकास यात्रा को नई गति प्राप्त होगी।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव लोक निर्माण श्री अजय चौहान, रूपाम के निदेशक श्री संजय कुमार, सचिव श्री दिव्य प्रकाश गिरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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