यूपी में नकली दवाओं के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़, लखनऊ-गोंडा में करोड़ों की अवैध दवाएं बरामद; राजस्थान से जुड़ा नेटवर्क बेनकाब

जनपत की खबर , 114

एफएसडीए और लखनऊ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में लखनऊ से ₹25 लाख, गोंडा से ₹1.30 करोड़ की संदिग्ध दवाएं जब्त, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क पर FIR दर्ज।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नकली, काउंटरफीट और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और लखनऊ पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई में लखनऊ और गोंडा सहित कई स्थानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये मूल्य की संदिग्ध एलोपैथिक एवं नारकोटिक दवाएं बरामद की गई हैं।
एफएसडीए के अनुसार, 8 और 9 जुलाई 2026 को औषधि निरीक्षकों की टीम ने लखनऊ पुलिस के सहयोग से अमीनाबाद स्थित बिना लाइसेंस संचालित एक अवैध गोदाम पर छापा मारा। यहां से लगभग ₹25 लाख मूल्य की संदिग्ध दवाएं बरामद की गईं। जांच के दौरान Telma, Pantop-40, Augmentin-625, Taxim, Zerodol-SP, Chymoral Forte सहित कई प्रतिष्ठित ब्रांडों की दवाओं के पैकेटों पर स्पेलिंग संबंधी गंभीर त्रुटियां मिलीं, जिससे उनके नकली होने की आशंका जताई गई।
छापेमारी के दौरान गोदाम संचालक रंजीत सिंह जुल्का कोई वैध औषधि लाइसेंस, खरीद-बिक्री के बिल अथवा अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच में यह भी सामने आया कि दवाएं राज विक्रम सिंह (लखनऊ), अमन कसौधन (गोंडा), रिहान (सीतापुर) तथा 'मिश्रा' नामक व्यक्ति (वाराणसी) सहित अन्य लोगों से बिना बिल के कम कीमत पर खरीदकर बाजार में बेची जा रही थीं।
कार्रवाई के दौरान 27 संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए, जबकि शेष दवाओं को न्यायालय की अनुमति के बाद विधिसम्मत तरीके से सील कर दिया गया।
जांच का दायरा बढ़ने पर बख्शी का तालाब स्थित एक अन्य अवैध गोदाम से करीब ₹3 लाख की संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं। वहीं गोंडा में अमन कसौधन और अन्य आरोपियों के ठिकानों से करीब ₹1.30 करोड़ मूल्य की अवैध नारकोटिक एवं अन्य औषधियां बरामद हुईं। यहां से भी 19 नमूने जांच के लिए लिए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध नेटवर्क के तार राजस्थान से जुड़े हैं। आरोप है कि भूपेंद्र शर्मा और एक गुर्जर नामक व्यक्ति राजस्थान में नकली दवाओं का निर्माण कराकर उन्हें उत्तर प्रदेश में सप्लाई कर रहे थे।
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भूपेंद्र शर्मा, वीरू सिंह चौहान (प्रयागराज), राज विक्रम सिंह (लखनऊ), अमन कसौधन (गोंडा), रिहान (सीतापुर), मिश्रा (वाराणसी) और रंजीत सिंह जुल्का (लखनऊ) सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत थाना अमीनाबाद, लखनऊ में एफआईआर दर्ज की गई है।
एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने और विवेचना पूरी होने के बाद दोषी व्यक्तियों एवं फर्मों के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की संबंधित धाराओं में भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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