मेटा सुसाइड अलर्ट से यूपी पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 24 घंटे में बरेली और वाराणसी में दो युवकों की बचाई जान
अन्य खबरे Mar 29, 2026 at 08:02 PM , 87लखनऊ। सोशल मीडिया पर आत्महत्या संबंधी पोस्ट को लेकर सक्रिय मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई के चलते उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बार फिर सतर्कता का उदाहरण पेश किया है। मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) द्वारा भेजे गए सुसाइड अलर्ट के आधार पर बीते 24 घंटों में बरेली और वाराणसी में दो युवकों की समय रहते जान बचा ली गई।
इस पहल के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को SKOCH Award-2025 और The Economic Times GovTech Awards-2026 से सम्मानित किया जा चुका है। 1 जनवरी 2023 से 25 मार्च 2026 तक इस व्यवस्था के माध्यम से कुल 2336 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्ण के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर ने मेटा से प्राप्त अलर्ट पर तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित जिलों को सूचित किया, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने बेहद कम समय में मौके पर पहुंचकर दोनों युवकों को बचाया।
बरेली मामला
28 मार्च 2026 को बरेली के थाना आंवला क्षेत्र के एक 20 वर्षीय युवक ने इंस्टाग्राम पर “आज मेरा आखिरी दिन है, मैं जहर खाने वाला हूं” लिखकर वीडियो पोस्ट किया। शाम 4:18 बजे मेटा से अलर्ट मिलते ही पुलिस मुख्यालय ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
सूचना मिलते ही आंवला थाना पुलिस मात्र 15 मिनट के भीतर युवक के घर पहुंच गई। मौके पर युवक ने हाथ पर ब्लेड से कट लगा रखा था और कीटनाशक पी लिया था। पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत सामान्य हो गई।
पूछताछ में युवक ने बताया कि प्रेम संबंध में परेशानी और मानसिक तनाव के कारण उसने यह कदम उठाया।
वाराणसी मामला
29 मार्च 2026 को वाराणसी के थाना चोलापुर क्षेत्र के एक 19 वर्षीय युवक ने इंस्टाग्राम पर “आज आखिरी रात है, मैंने जहर खा लिया” लिखकर वीडियो पोस्ट किया। इस पर रात 1:45 बजे मेटा की ओर से अलर्ट मिला।
चोलापुर थाना पुलिस ने 17 मिनट के भीतर युवक के घर पहुंचकर उसे कीटनाशक पीने से रोक लिया। युवक के पास जहर घोलने वाला ग्लास और खाली पैकेट मिला। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर उसकी जान बचाई और प्राथमिक उपचार कराया।
युवक ने बताया कि वह मजदूरी करता है और प्रेम संबंध में असफलता के कारण अवसाद में था।
काउंसलिंग और जागरूकता
दोनों मामलों में पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप कर न केवल युवकों की जान बचाई, बल्कि उनकी काउंसलिंग भी की। युवकों ने भविष्य में ऐसा कदम न उठाने का आश्वासन दिया। परिजनों ने पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता के लिए आभार व्यक्त किया।
यह पूरी घटना दर्शाती है कि तकनीक और सतर्क पुलिसिंग के समन्वय से आत्महत्या जैसे संवेदनशील मामलों में समय रहते हस्तक्षेप कर कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।



























Comments