1025 करोड़ की ठगी का आरोप: शाइन सिटी ग्रुप के मुख्य आरोपी राशिद नसीम दुबई में फरार, 86 गिरफ्तार
राष्ट्रीय Feb 27, 2026 at 09:40 PM , 100लखनऊ/प्रयागराज। बहुचर्चित निवेश घोटाले में फंसे Shine City Group of Companies के मुख्य/प्रबंध निदेशक राशिद नसीम समेत अन्य पर बड़ी कार्रवाई जारी है। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने 5000 से अधिक निवेशकों से करीब 1025 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई, लेकिन न तो प्लॉट/भू-खंड दिए और न ही निवेश की रकम लौटाई।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में राशिद नसीम ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, कानपुर से शाइन सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. का पंजीकरण कराया था। कंपनी में उसके सगे भाई आसिफ नसीम सहित अन्य लोग निदेशक थे। बाद में आरओसी कानपुर, दिल्ली और हरियाणा से 33 सहायक कंपनियां भी पंजीकृत कराई गईं। कंपनी ने सस्ते प्लॉट, ज्वैलरी और लग्जरी गाड़ियों का लालच देकर बड़े पैमाने पर निवेश कराया।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी समेत राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड में कार्यालय खोलकर आकर्षक योजनाओं का प्रचार किया गया। समयावधि पूरी होने के बाद निवेशकों को न तो भूखंड मिले और न धनवापसी हुई। इसके बाद कार्यालय बंद कर आरोपी फरार हो गए।
निवेशकों की शिकायत पर प्रदेश के विभिन्न थानों में 550 मुकदमे दर्ज हुए, जिन्हें शासन के आदेश पर अप्रैल 2021 से Economic Offences Wing Uttar Pradesh (ईओडब्ल्यू) को जांच के लिए सौंपा गया।
ईओडब्ल्यू की विवेचना में अब तक 86 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। 527 मामलों में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किए गए हैं। हालांकि मुख्य आरोपी राशिद नसीम और एक अन्य अभियुक्त अब भी फरार हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2019 में राशिद नसीम भारत से नेपाल के रास्ते फरार होकर दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) में रह रहा है। उसके विरुद्ध एनबीडब्ल्यू, धारा 82-83 सीआरपीसी (कुर्की), लुक आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। उसका पासपोर्ट भी निरस्त कर दिया गया है।
राशिद नसीम, आसिफ नसीम व अन्य के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है। लखनऊ स्थित फ्लैट, प्रयागराज स्थित मकान समेत अन्य संपत्तियां ईओडब्ल्यू द्वारा सीज की जा चुकी हैं। संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पण के लिए प्रस्ताव विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से भेजा गया है, जो वहां की सरकार के समक्ष विचाराधीन है।
प्रकरण को प्रदेश के बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल माना जा रहा है और हजारों निवेशक अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।































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