राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलने से पहले उन्हें अपने शासनकाल की भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए: राजेश्वर सिंह

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निर्णय पद पर रहते हुए होते हैं, सेवानिवृत्ति के बाद बयान देकर नहीं: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ। सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर सेवानिवृत्ति के बाद दिए गए बयान जिम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकते। नेता विपक्ष द्वारा लोकसभा में उठाये गए पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित पुस्तक के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. सिंह ने देश की ओर से कुछ स्पष्ट और गंभीर प्रश्न उठाए। 
• यदि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर खतरे वास्तव में इतने गंभीर थे, तो जनरल नरवणे ने पद पर रहते हुए इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया?
• यदि उन्हें लगता था कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो वे पद पर बने क्यों रहे?
• सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब उनके पास पूर्ण संवैधानिक अधिकार और सैन्य कमान थी, तब निर्णायक कार्रवाई करने से उन्हें किसने रोका?
जनरल नरवणे को इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा “राष्ट्रीय हित पुस्तकों, साक्षात्कारों या सेवानिवृत्ति के बाद दिए गए बयानों से सुरक्षित नहीं होता। वह उस समय लिए गए निर्णयों से सुरक्षित होता है, जब जिम्मेदारी और अधिकार दोनों मौजूद हों।”उन्होंने कहा कि सेना और नौकरशाही के हर अधिकारी ने संविधान और राष्ट्र के प्रति शपथ ली होती है। “यदि कोई विषय वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था, तो उस पर कार्रवाई उसी समय होनी चाहिए थी। सेवानिवृत्ति के बाद बोलना साहस नहीं, सुविधा है।”
डॉ. सिंह ने चेतावनी दी कि इस प्रकार के चयनित और विलंबित खुलासे संस्थाओं की साख को कमजोर करते हैं और जनता के विश्वास को चोट पहुँचाते हैं। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलने से पहले उन्हें अपने शासनकाल की भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “26/11 जैसे भीषण आतंकी हमले के बाद कांग्रेस सरकार ने क्या ठोस, निर्णायक और निवारक कार्रवाई की—इसका उत्तर देश आज भी चाहता है।”
डॉ. सिंह ने कहा, “इतिहास उन्हें याद रखता है जो कठिन समय में निर्णय लेते हैं, न कि उन्हें जो जिम्मेदारी समाप्त होने के बाद बयान देते हैं।

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